Vardaan: वरदान

byPremchand

|Hindi
February 27, 2020|
Vardaan: वरदान by Premchand
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Kobo ebook

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about

विरजन ने पूछा- तुम मुझसे क्यों रुष्ट हो? मैंने कोई अपराध किया है?
प्रताप- न जाने क्यों अब तुम्हें देखता हूं, तो जी चाहता है कि कहीं चला जाऊं।
विरजन- क्या तुमको मेरी तनिक भी मोह नहीं लगती? मैं दिन-भर रोया करती हूं। तुम्हें मुझ पर दया नहीं आती? तुम मुझसे बोलते तक नहीं। बतलाओ मैंने तुम्हें क्या कहा जो तुम रूठ गये?
प्रताप- मैं तुमसे रूठा थोड़े ही हूं।
विरजन- तो मुझसे बोलते क्यों नहीं?
प्रताप- मैं चाहता हूं कि तुम्हें भूल जाऊं। तुम धनवान हो, तुम्हारे माता-पिता धनी हैं, मैं अनाथ हूं। मेरा तुम्हारा क्या साथ?
- इसी पुस्तक से।

Title:Vardaan: वरदानFormat:Kobo ebookPublished:February 27, 2020Publisher:Prabhakar Prakashan Private LimitedLanguage:Hindi

The following ISBNs are associated with this title:

ISBN - 10:9389851602

ISBN - 13:9789389851601

Appropriate for ages: All ages

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